Friday, September 16, 2011

वो एक दरख़्त..


वो एक दरख्त जो कई सालों से बड़ी मज़बूती से खड़ा था...
जिसे किसी के सहारे की ज़रूरत न थी, 
जिसकी छांव के नीचे सब सुकून पाते थे, 
जिसने हर छोटी और बड़ी बेल को सहारा दिया, 
जिससे लिपटकर कुछ तो ऊंचाइयों को छू गए, 
कुछ आसमान छूने के सपने संजोते रहे, 
बारिश की बूंदों से अपनी प्यास बुझाता था, 
उस दरख़्त को माली भी नसीब न था, 
जो उसकी जड़ों में कुछ प्यार का पानी उड़ेलता 
और अपने हाथों से उसे सींचता 
फिर हवा में लहलहाते हरे पत्तों को देखकर खुश होता। 
पर हर दरख्त अपनी किस्मत लेकर आता है, 
इसकी भी किस्मत कुछ ऐसी थी। 
सबको सहारा दिया..किसी से सहारा न लिया, 
वो सबका अपना था पर कोई भी उसका न था। 
उसे सब प्यारे थे, पर वो किसी का प्यारा न था। 
उसकी छाल पर झुर्रियां उकरने लगी थीं, 
जिन्हें देखकर उम्र का अंदाज़ा लगाना आसान था, 
वो दरख्त अब बूढ़ा हो चला था। 
ऊपर सिकुड़ती छाल थी और अंदर एक कमज़ोर जिस्म।
पीले पत्तों और सिमटती टहनियों को देखकर भी कोई जान न पाया,
कि खड़े रहने के लिए अब उसे ज़रूरत थी..
किसी सहारे की, किसी माली की।
आज एक हवा का झोंका आया 
और वो मज़बूत दरख्त हवा से भी हल्का हो गया, 
हवा की ठोकर लगी और ज़माने से ठोस सा दिखने वाला वो दरख़्त
ज़मीन पर गिर पड़ा।
काश ! कोई होता जो उसे समझ पाता, 
सिर्फ लेने के सिवा..उसे कुछ दे भी पाता। 
उसके अंदर झांककर कर देख पाता, 
उसके दुख-दर्द महसूस कर पाता, 
उसके कमजोर जिस्म को सहारा दे पाता,
मगर ये उस दरख़्त की किस्मत थी...
ये होता तो कुछ दिन और जी जाता। 

  dedicated to my 'amma'

5 comments:

  1. ATI UTTAM........
    THIS IS REALLY TOUCHING..

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  2. Even i am speechless.....
    We all will miss her.

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  3. रचना मार्मिक है

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  4. hey diii....last sunday i was at my home...suresh uncle visited at our place....der he spoke bout dis creation of urs....since den i was searching u on social sites....n finally got u...m really happie.....

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।