Friday, September 2, 2011

वास्तु- सूत्र 1

वास्तु के कुछ नियम हैं, जिनके आधार पर घर का निर्माण किया जाता है, पर निर्माण के वक्त यदि कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए तो नतीजे सुखद होंगे। पुराने ज़माने और आज में बहुत फर्क है। आज हमारा रहन-सहन कहीं सीमित हो चुका है। पहले बड़े-बड़े घर हुआ करते थे, जहां बड़ा सा आंगन होता था। पर आजकल के घर भी आंगन जितने बड़े या यूं कहें कि छोटे हो गए हैं। घर की जगह फ्लैटों ने ले ली है..जो हम नहीं बिल्डर के दिमाग़ से बनाए जाते हैं। बड़े ही खुशकिस्मत लोग होते हैं जो खुद की ज़मीन पर अपने सपनों का घर बनाते हैं। पर जो हमारे पास है उसी में बिना तोड़फोड़ किए कुछ बदलाव किए जा सकते हैं ।

सबसे पहले दिशा का ज्ञान होना चाहिए। जो इस प्रकार है।
उत्तर-पूर्व (NORTH-EAST)- ईशान कोण
दक्षिण-पूर्व (SOUTH-EAST)- आग्नेय कोण
उत्तर-पश्चिम (NORTH-WEST)- वायव्य कोण
दक्षिण-पश्चिम (SOUTH-WEST)- नैऋत्य कोण

* रसोईघर आग्नेय कोण में होना चाहिए। आग्नेय कोण यानि दक्षिण-पूर्व (SOUTH-EAST) का कोना।  खाना पूर्व में मुख कर बनाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर अग्नि तत्व में वृद्धि नहीं हो पाती।

उपाय- दक्षिण-पूर्व (SOUTH-EAST) कोने खाली नहीं होना चाहिए। घर की इलैक्ट्रौनिक वस्तुएं जैसे फ्रीज़. टीवी इत्यादि को इस कोने में रखकर इसे समृद्ध बनाया जा सकता है। इस कोने में लाल रंग का बल्ब जलाना चाहिए।




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