Friday, August 5, 2011

नम आंखें....


अपने आंचल में आज देखा 
आंसुओं की नमी थी..
मगर मैं तो रोई न थी..
तो फिर ये आंसू कैसे?
जवाब मासूम सा था,
आंसू नन्हीं आंखों के थे।
उसकी आंखें ही बोलती हैं..
वो मेरी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं..
ज़िंदगी है..
वो आज परेशान है..
मेरे आंचल में सुकून तलाश रहा है..
मुझे पता है..
उसे लगता है
मां सब कुछ ठीक कर देगी..
मां..
पर वो शायद समझ रहा है..
मेरी छलकी आंखों ने उसे जवाब दे दिया है..
उसका और मेरा दर्द एक है.
मै परेशान हूं..
क्योंकि वो परेशान है..
मेरा बेटा..मेरा सबकुछ..
मेरी आंखें भी अब नम हैं..
और वो 
मेरे आंसू पोछ रहा है..



3 comments:

  1. Usko apni Maa pe viswas hai, or mujhe bhi uski Maa pe viswas hai ki uski pareshaani ka hal uski Maa k pass hi hai or agar wo thaan le to kuch bhi kar sakti hai.

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  2. Parul
    A very touching composition I could feel the pain indeed....there's nothing better than mother's lap in this world...
    beautiful creation...keep it up...!

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  3. uski maasoom aankhen wo bol rahi hain jo wo bol nahi sakta apni Maa ko,h just wants to say-main kabhi batlata nahi teri parwah karta hun main Maa!!! Meri Maa!!! Love U Maa!!!

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