Friday, December 30, 2011

नन्ही परी...


भगवान ने उसे भेजकर सबको हैरान कर दिया..
हमारे घर में फिर से खुशी आई थी....
उम्मीद से बढ़कर थी
तीन बहनों के बाद भी लाड़ली थी
घर में गीत गूंजा करते थे
मां के लिए 'बंधन' थी प्यार का
और पापा उसे 'नन्ही परी' कहते थे

प्यार दुलार की बहार चली
वो नन्हीं परी भी इतराई चली
कभी एक गोद, तो कभी दूसरी में गई
कभी प्यार लिया तो कभी देकर चली गई

उसका जन्मदिन कुछ ख़ास होता था
घर का सबसे छोटा सदस्य उस दिन राजा होता था
हर बार खुशियां मनाई जातीं
गुब्बारे, रिबन, केक और ढ़ेर सारी ़टॉफियां
मैं हर बार कमरा सजाती
प्यार से उसे बाहों में भर लेती
और छोटे-छोटे तोहफ़े
उसके छोटे छोटे हाथों में देती 

समय गुज़रता चला गया
जन्मदिन का चेहरा भी बदलता चला गया
अब न कमरा सजता था
न गुब्बारे, न रिबन, और न ढ़ेर सारी ़टॉफियां
वो छोटे छोटे तोहफ़े भी अब नहीं थे
ऐसा इसलिए नहीं था कि वो बड़ी हो गई थी
ऐसा इसलिए था कि उसकी बड़ी बहन वहां नहीं थी
वो तो वहीं है वैसी ही है, सबकी लाड़ली,
सबसे प्यारी...मेरी छोटी बहन

आज भी जी चाहता है 
उसका हर जन्मदिन वैसे ही मनाऊं
फिर से कमरा सजाऊं...
क्या करूं...कैसे उसके पास पहुंच जाऊं
कितने साल बीत गये
उसे तोहफ़े दिये हुए..
उसे बाहों में भरे हुए...
बहुत याद आते हैं वो दिन
वो गुब्बारे, वो रिबन, 
और उन सबसे प्यारी तुम...

सबसे प्यारी हो...सबकी प्यारी रहना
खुश रहना और सबको सुखी रखना
जन्मदिन की शुभकामनाएं !!

                                                        तुम्हारी बहन....

Sunday, December 25, 2011

आभार.....


मेरे ब्लाग के तमाम सुधि पाठक एवं मित्रों.. आप सभी का ह्रदय से आभार.. ये इसलिए कि मेरे ब्लाग की पाठक संख्या अब 2000 पार कर चुकी है। मेरे  लिए ये महज़ एक संख्या नहीं है.. इसमें छिपा है आप सभी का स्नेह.. मै नंबर गेम में यकीन नहीं करती.. लेकिन आप सभी की कसौटियों पर खरी उतरुंगी ये विश्वास अवश्य दिलाना चाहूंगी...

पारुल..

Thursday, December 22, 2011

वास्तु- सूत्र 5



कहते हैं कि भगवान हर जगह विद्धमान है। लेकिन हर घर में उनका एक अलग स्थान होता है। घर के वास्तु में सबसे महत्वपूर्ण है भगवान का स्थान। घर के मंदिर को सही दिशा में रखना बेहद ज़रूरी होता है।
पूजा स्थल ईशान कोण यानि घर की उत्तर-पूर्व (NORTH-EAST) दिशा में होना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पूजा करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो। ऐसा करने से सुख-समृद्धि और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।



Wednesday, December 21, 2011

कुछ कहना है...


कुछ कहना है, जो आज तक कभी कहा नहीं,
जो सालों से मन में था पर कभी दिखाया नहीं,
मुझे मौका तो दो...

अपनी दुनिया मुझे कहते हो, हर पल साथ रहते हो,
कहीं जाते ही नहीं, इंतज़ार करवाते ही नहीं
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम देर से घर क्यों आते हो?

मेरी ग़लतियों को क्यों हवा में उड़ाते हो,
उनपर हमेशा मुसकुराते हो
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम हमेशा मुझे ड़ांटते क्यों हो?

जब मैं खाने में नमक ज़्यादा डालती हूं
तुम कहते हो कि खाना अच्छा है,
खुश होकर वो भी खा लेते हो
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम मेरे खाने में कमियां क्यों निकालते हो?

मेरी इजाज़त के बग़ैर मेरी आंखें पढ़ लेते हो,
मेरे कहने से पहले मेरी बातें समझ लेते हो
मुझे शिकायत का मौका तो दो...
कि तुम मुझे समझते क्यों नहीं हो?

कभी जब कुछ करने का मन नहीं होता
तुम कैसे मेरे आलस्य को जान लेते हो
कहते हो आज बाहर खाने का मन है,
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम कभी मेरे बारे में क्यों नहीं सोचते?

सजना संवरना मुझसे नहीं होता
सोने चांदी का भी शौक़ नहीं है,
फिर भी मुझे हीरा तोहफ़े में देते हो
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम कभी मेरे लिए कुछ लाते क्यों नहीं?

रंग रूप, चमक-दमक, शक्लो सूरत में नहीं
तुम्हारी सोच के दर्पण में मैं कुछ और हूं कहीं 
कहते हो कि तुम सच्ची हो,
सबसे अलग और अच्छी हो
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम मेरी तारीफ़ क्यों नहीं करते?

सपने हमेशा मेरी आंखों में तैरते हैं
ढ़ेरों आकांक्षाएं साथ लिए चलती हूं,
तुमसे तुम्हारे सपने पूछे तो कहा,
तुम्हारे सपनों को सच करना ही सपना है मेरा
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम मेरे लिए कुछ करते क्यों नहीं?

कोई उम्मीद अब बाक़ी नहीं,
तुम मिले तो सबकुछ पा लिया,
मेरे अच्छे कर्मों का फल हो शायद
जो ईश्वर ने बिन मांगे दिया
और क्या अब मांगू उससे
उसने किस्मत में तुम्हें लिख दिया।



Wednesday, December 7, 2011

अभी और भी जीना है..



उगते सूरज ने आज मुझसे कहा
चलो, कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी चलना है
अभी और भी जीना है

ये बाल अब पकने लगे, 
माथे के बल भी बढ़ने लगे
आंखों की चमक खो रही 
होंठों की हंसी को बनाए रखना है 
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

मुश्किलों का क्या है, 
आएंगी जाएंगी
अभी और लड़ना है
अभी और जीतना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

जीवन के हर मोड़ पर 
तुम्हें पत्थर कई मिलेंगे
उनको संजोना है और
नाम अपना लिखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

ड़ालियों के फूल मुरझा न जाएं
उन्हें बागीचे में सजाए रखना हैं
हर सुबह सींचना है 
हर रात देखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

आंधियां तो आएंगी और सताएंगी
हवा ही तो हैं...हवा हो जाएंगी
बस चरागों की लौ को थामे रखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है



Wednesday, November 23, 2011

प्यार की कुछ क्यारियां..




प्यार की कुछ क्यारियां...मेरे पास ढ़ेर सारी हैं,
हर क्यारी प्यारी है, हर क्यारी न्यारी है।

कई सारे फूल खिलते हैं,  
अलग अलग रंगों में मिलते हैं।
कुछ चटख, कुछ कोमल, कुछ बड़े रंगीले से, 
कुछ लाल, कुछ नीले, कुछ पीले पीले से। 

उनकी ख़ुशबू कि जीवन महका जाए,
नरम इतने के रूह सुकून पाए।
पास हों तो आंखों में चमक होती है,
दूर हो जाएं तो आंसुओं की नमी होती है।

हर मौसम में हरे रहते हैं,
इन क्यारियों में हमेशा बसे रहते हैं।
कुछ फूल हैं शायद या ख़्वाब कहीं के, 
खिलते हैं यहां और आंखों में बसा करते हैं।।



HOME REMEDIES - मूली

मूली (Radish)- वैज्ञानिक नाम- Raphanus sativus L. इसे हम मूली, मूला, मुड़ा आदि नामों से भी जानते हैं। मूली को प्रायः हम सलाद में खाते हैं और मूली भाजी और मूली के पराठों के तो क्या कहने। स्वादिष्ट होने के साथ साथ मूली में औषधीय गुण भी होते हैं, जिन्हें जानकर कई परेशानियों से निजात पाई जा सकती है। मूली के बीज और जड़ से तेल भी निकाला जाता है जो उड़नशील होता है। 100 ग्राम मूली में 0.1 मिलीग्राम आर्सेनिक पाया जाता है।

औषधीय प्रयोग-
कंठशुद्धी- मूली के 5-10 ग्राम पिसे बीजों को गर्म पानी के साथ दिन में 3 बार फंकी लेने से गला साफ होता है।
श्वास- मूली का 500 मिलीग्राम से 2 ग्राम क्षार 1 चम्मच शहद में मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटने से श्वास रोग में लाभ मिलता है।
पाचन- मूली खाना खाने के बाद भोजन को पचाती है, पर भोजन के पहले खाने पर यह पचने में भारी होती है।
अम्लपित्त- मूली या मूली के पत्तों के 10-20 ग्राम रस में मिश्री मिलाकर खाने से लाभ होता है।
पेटदर्द- मूली के रस 25ml रस में नमक और पिसी कालीमिर्च डालकर 3-4 बार पीने से पेटदर्द ठीक हो जाता है।
पथरी- मूली की शाखों के 100 ग्राम रस को दिन में 3 बार पीने से पथरी के टुकड़े हो जाते हैं। मूली के पत्तों के 10 ग्राम रस में अजमोद(parsley, celery) मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पथरी गल जाती है।
सूजन-मूली के 2 ग्राम बीज, 5 ग्राम तिल के साथ दिन में 3 बार लेने से सब प्रकार की सूजन मिटती है।
दाद- मूली के बीजों को निंबू के रस में पीसकर लगाएं, लाभ होगा।

   

Wednesday, November 16, 2011

तो चले जाना...



कुछ देर ज़रा रुक जाओ,
थोड़ा सुकूं आने दो
दिल को ठंडक मिल जाए,
तो चले जाना...

आंख भर आने दो,
धड़कने बढ़ जाने दो
रूह में करार आए,
तो चले जाना...

तेरे दिल से जो निकली,
उस आह को छूने दो
हर दर्द दिल में उतर जाए,
तो चले जाना...

तेरी आंखों से जो निकली,
उस नमी को पीने दो
ग़म सारे सिमट जाए,
तो चले जाना...

सांस को सांस आए,
ये रात ज़रा धुंधलाए,
जज़बात करार पा जाए
तो चले जाना...




Friday, November 4, 2011

ये सच्चाई है..


कुछ चीजें अनायास ही सामने आ जाती हैं
जो अहसास करा जाती हैं वास्तविकता का
बताती हैं कि आज जो हम हैं कल वो नहीं होंगे
ये लड़कपन आज का, कल झुर्रियों में बदल जाएगा
मजबूरी कभी, सठियाना कभी, तो कभी बुढ़ापा कहलाएगा

आज हम उन अपनों के पास नहीं हैं 
कल हमारे पास कौन होगा ?
हम खुद भी ऐसे न सही, मजबूरी सही
अपने बच्चों को भी क्या ये 
मजबूरी ही देकर जाएंगे ?

कुछ सवाल परेशान कर देते हैं
जिनके जवाब मिलते ही नहीं
सच्चाई कड़वी होती है, निगली नहीं जाती
बुढापा भी शायद ऐसा ही होता है, 
सच्चाई की तरह कड़वा
अकेले जिया नहीं जाता !

Friday, October 28, 2011

दिये वाली दीपावली...


दीपावली, कहने को तो दीपावली दीपों का त्यौहार है..पर इस शब्द के मायने अब वो नहीं जो कभी थे। दीप जलाकर लोग लक्ष्मी जी का स्वागत किया करते थे...हर घर में दियों की रौशनी झिलमिलाती थी। थालों में ढेरों दिये सजाए जाते फिर उन्हें घर के हर कोने में इस तरह रखा जाता कि घर का कोई भी हिस्सा अंधकारमय न रहे। ये दिये हमारी परम्पराओं का हिस्सा रहे हैं। प्रतिदिन की पूजा-अर्चना से लेकर हर त्यौहार पर दिये जलते हैं। हमारी संस्कृति, हमारी परम्परा में इन दियों की महत्ता को कोई झुठला नहीं सकता। पर अब दीपावली पर दियों की गिनती भी कम हो गई है। दियों की पवित्र लौ आज बनावटी रौशनी में कहीं खो गई है। भारत के त्यौहारों पर भी अब चाइना हावी है। हर तरफ टिमटिमाती दिखती हैं चाइनीज़ लाइट्स..ये लाइट्स हर किसी की जेब के लिए किफायती हैं...इसलिए हर तरफ इन्हीं की चमक दिखती है।  नज़ारा ये है कि अब दीपावली पर ज़्यादातर घरों में यही लाइट्स दिखाई देती हैं और हमारे छोटे छोटे दिये कहीं गुम से हो गए हैं। कुछ लोग तो शगुन करने के लिए गिनती के दिये जलाते हैं और दोबारा उनमें तेल डालना भी भूल जाते हैं।
रंग बिरंगी ये चमचमाती लाइट्स अच्छी तो लगती हैं पर उस दिये जैसी दिव्य और पावन नहीं लगतीं। और ये छोटी सी चीज़ जो देखने में इतनी सुंदर है, पवित्र है इसके रचनाकार के बारे में सोचकर ये भावुक मन और भी भावपूर्ण हो जाता है.. वो हैं हमारे देश के कुम्हार.. जो इस धरती की पावन मिट्टी लेकर उसे पानी से गूंधते हैं और अपने हाथों से चाक पर रखकर ये नन्हे नन्हे दिए बनाते हैं। मेहनत करके ऐसे ही मिट्टी के छोटे छोटे बर्तन बनाकर अपनी गुजर बसर करते हैं। दीपावली नज़दीक आते ही इनका उत्साह दोगुना हो जाता है। इस उम्मीद पर कि लोग दिए खरीदेंगे...वो रातों को भी जागकर ढेरों दिये तैयार करता है। और दीपावली का दिन आते ही उन्हें ये पता चलता है कि इस बार तो दिये पिछले साल से भी कम बिके...दीपावली के त्यौहार पर न जाने कितने ही कुम्हारों की आंखें नम होती हैं। और हम वो सुंदर-सुंदर, छोटी-छोटी रंगबिरंगी लाइट्स खरीदने में व्यस्त रहते है।

Saturday, October 15, 2011

The moon



I always shared my secrets with him,
I always talked to him through out the nights,
I always admired him for his calmness,
How serene, how philosophic, how quiet is he.

He has always been my good friend,
he has always given me strength,
his shoulders are always there for me, 
How sedate, how strong, how trusty is he.

He is my worship, he is my acquisition,
he is my companion, he is my mate,
he is my moon... 
The moon of my life !! 

Wednesday, October 12, 2011

जग जीत लिया


वो अहसास होते हैं,
वो जज़बात होते हैं
वो सुकून होते हैं...
कुछ लोग गीत होते हैं
वो कभी नहीं झरते 
कुछ लोग सुर होते हैं
वो कभी नहीं बिखरते
कुछ लोग संगीत होते हैं,
वो कभी नहीं मरते।।
 in the memory of a legend Sir Jagjit Singh !


Sunday, October 9, 2011

कहां खो गई ममता ?

आजकल अखबार पढ़ने का मन नहीं करता। अखबार ऐसी खबरों से भरा होता है जो खबरें तो हैं, मगर किसी को भी परेशान और दुखी कर देती हैं। ऐसी खबरों को पढ़कर मन और दिमाग दोनों ही अस्थिर हो जाते हैं। अब कसूर अखबारों का तो है नहीं, उनका तो काम ही खबरों को सामने लाना है। कसूर है तो शायद इस दुनिया का जो बहुत निर्दयी होती जा रही है। पता नहीं क्यों लोगों के दिल पत्थर के हो गए हैं। इसीलिए दिल से किए जाने वाले काम अब दिमाग कर रहा है।
'बच्चे' ये वो शब्द है जिसके साथ ममता हमेशा जुड़ी रहती है। ईश्वर की कृपा ही ऐसी है कि उन्होंने ये सुख सिर्फ एक औरत को ही दिया है, एक मां ही जीवनदायिनी होती है और उसको ममता की मूरत कहा गया है। पर आजकल कुछ माताएं, मां शब्द के मायने ही भूल गई हैं। शायद वो एक बात मान बैठी हैं कि अगर वो बच्चे को जन्म दे सकती हैं तो वो उसका जीवन ले भी सकती हैं।
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के एक गांव में किसी ने अपने मासूम बच्चे को ज़मीन में गाड़ दिया। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि वो एक लड़की थी। किसी ने बच्चे के रोने की आवाज़ सुनी और उसे बाहर निकाला। बच्ची चार दिन की है और बेहद कमजोर है, उसे पीलिया भी है। इस बच्ची को इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। उसका नाम मिताली रखा गया है क्योंकि वो सीता माता की तरह ज़मीन से निकली है। सीता माता का नाम भी मिताली था।
खैर ल़डकियों को पैदा होते ही मार देना कोई नई बात नहीं है। हमारे देश के शहर और गांवों में ये कुकृत्य तो होता ही आ रहा है। इस बच्ची की किस्मत अच्छी थी कि बच गई, वरना न जाने कितनी ही बच्चियां ऐसे ही ज़मीन में गाड़ दी जाती हैं और कोई उनकी चीखें भी नहीं सुन पाता।
इस दुनिया में हज़ारों ऐसे लोग हैं जो औलाद के सुख के लिए तरसते हैं। भगवान से कितनी ही मिन्नतें करते हैं एक बच्चे की किलकारी सुनने के लिए। और कुछ निर्दयी ऐसे भी हैं कि सिर्फ जिम्मेदारी उठाने के ड़र से, जान लेने जैसा घिनौना काम भी कर डालते हैं। उस मां ने भी तो इस बच्चे को नौ महीने उपनी कोख में संभालकर रखा होगा, उससे बातें भी की होंगी, अपना ध्यान भी रखा होगा कि कहीं बच्चे को कुछ नुकसान न हो..पर ये देखते ही कि वो एक लड़की है, उस मां की ममता कहीं खो गई, उसका दिल पत्थर का हो गया। शायद इंसानों से अच्छे जानवर होते हैं, जिनकी ममता अपने बच्चों के लिए बराबर होती है, वो कभी अपने जन्मे बच्चे की हत्या नहीं करते।

Thursday, October 6, 2011

विजयदशमी


किसी की जीत किसी की हार बन गई।
वो विजय आज त्यौहार बन गई,
मुझे भी लड़ना है, 
और जीतना है, 
मेरे अंदर के रावण से 
बाहर के अनेकों रावणों पर विजय पानी है,
मुझे भी विजयदशमी मनानी है।

Saturday, October 1, 2011

वास्तु- सूत्र 4



घर की कुछ बातों को सामान्य जानकर हम उनपर ध्यान नहीं देते। लेकिन बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिनपर थोड़ा सा भी ध्यान दिया जाए तो अच्छे नतीजे सामने आ सकते हैं। ऐसी ही एक सामान्य, लेकिन महत्वपूर्ण चीज है घड़ी।
वास्तु के अनुसार घड़ियों को हमेशा घर के पूर्व(EAST) या उत्तर(NORTH) दिशा में लगाना चाहिए। कहा जाता है कि इन दिशाओं में घड़ी लगाने से अच्छा समय जल्दी आता है और अच्छे समय के आने में रुकावट नहीं आती। घड़ियों को पश्चिम या दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए।

Monday, September 26, 2011

HOME REMEDIES - आंवला



आंवला(Indian gooseberry)- वैज्ञानिक नाम Emblica officinalis G. इसे हम आमला, आंवला, आमलकी, आंगला आदि नाम से भी जानते हैं। ये आंवले का मौसम है। और इस मौसम में आंवले का जितना फ़ायदा उठाया जा सके, उठा लीजिए। आंवला हमारे लिए वरदान है इसलिए इसे अमृत फल कहा गया है। आंवला में विटामिन 'सी' पाया जाता है। एक नारंगी के रस से 20 गुना ज़्यादा विटामिन C आंवले में होता है।
औषधीय प्रयोग-
नकसीर- आंवला, जामुन और आम को बारीक पीसकर माथे पर लेप करने से नकसीर का रक्त रुक जाता है।
हिचकी- आंवले का 20 ग्राम रस और 2-3 ग्राम पीपल को चूर्ण को शहद में मिलाकर लेने से हिचकी ठीक होती हैं।
अम्लपित्त- मिश्री और शहद के साथ 1-2 आंवले सुबह शाम खाने से खट्टी डकारें और अम्लपित्त ठीक होता है।
गठिया- 20 ग्राम सूखे आंवले, 20 ग्राम गुड़ को 500 ग्राम पानी में उबालें, आधा हो जाने पर छान लें। इसे सुबह शाम पीने से गठिया में लाभ होता है। इस प्रयोग में नमक नहीं लेना चाहिए।
खुजली- आंवले की गुठली को जला लें और राख को नारियल तेल में मिलाकर खुजली पर लगाने से लाभ होता है।
पित्तरोग- आंवले का मुरब्बा 1-2 नग सुबह खाली पेट खाने से पित्त के रोग मिटते हैं।
घाव- शरीर में अगर चोट लग जाए तो रक्त रोकने के लिए आंवले का रस लगाने से लाभ होता है।
दीर्घायु- आंवले के चूर्ण को रात को घी या शहद के साथ लेने से इंद्रियों का बल बढ़ता है और इंसान दीर्घायु होता है। इससे आंखों की रौशनी भी बढ़ती है।
केश- आंवले के चूर्ण को पानी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल काले और लम्बे होते हैं।
मधुमेह- आंवले के रस में शहद मिलाकर लेने से मधुमेह में लाभ होता है।

आंवले को अपनी दिनचर्या में शामिल कीजिए। इसे किसी भी तरह लिया जा सकता है। चाहे वो आंवले का रस हो, आंवले का चूर्ण, चटनी या अचार हो । जो लोग खट्टा खाने से बचते हैं वो आंवले का च्यवनप्राश, आंवले का मुरब्बा और आमला कैण्डी भी ले सकते है।

Friday, September 16, 2011

वो एक दरख़्त..


वो एक दरख्त जो कई सालों से बड़ी मज़बूती से खड़ा था...
जिसे किसी के सहारे की ज़रूरत न थी, 
जिसकी छांव के नीचे सब सुकून पाते थे, 
जिसने हर छोटी और बड़ी बेल को सहारा दिया, 
जिससे लिपटकर कुछ तो ऊंचाइयों को छू गए, 
कुछ आसमान छूने के सपने संजोते रहे, 
बारिश की बूंदों से अपनी प्यास बुझाता था, 
उस दरख़्त को माली भी नसीब न था, 
जो उसकी जड़ों में कुछ प्यार का पानी उड़ेलता 
और अपने हाथों से उसे सींचता 
फिर हवा में लहलहाते हरे पत्तों को देखकर खुश होता। 
पर हर दरख्त अपनी किस्मत लेकर आता है, 
इसकी भी किस्मत कुछ ऐसी थी। 
सबको सहारा दिया..किसी से सहारा न लिया, 
वो सबका अपना था पर कोई भी उसका न था। 
उसे सब प्यारे थे, पर वो किसी का प्यारा न था। 
उसकी छाल पर झुर्रियां उकरने लगी थीं, 
जिन्हें देखकर उम्र का अंदाज़ा लगाना आसान था, 
वो दरख्त अब बूढ़ा हो चला था। 
ऊपर सिकुड़ती छाल थी और अंदर एक कमज़ोर जिस्म।
पीले पत्तों और सिमटती टहनियों को देखकर भी कोई जान न पाया,
कि खड़े रहने के लिए अब उसे ज़रूरत थी..
किसी सहारे की, किसी माली की।
आज एक हवा का झोंका आया 
और वो मज़बूत दरख्त हवा से भी हल्का हो गया, 
हवा की ठोकर लगी और ज़माने से ठोस सा दिखने वाला वो दरख़्त
ज़मीन पर गिर पड़ा।
काश ! कोई होता जो उसे समझ पाता, 
सिर्फ लेने के सिवा..उसे कुछ दे भी पाता। 
उसके अंदर झांककर कर देख पाता, 
उसके दुख-दर्द महसूस कर पाता, 
उसके कमजोर जिस्म को सहारा दे पाता,
मगर ये उस दरख़्त की किस्मत थी...
ये होता तो कुछ दिन और जी जाता। 

  dedicated to my 'amma'

Friday, September 9, 2011

हर बार यही होता है यहां..



हर बार यही होता है यहां, हर बार अंधेरा छाता है
एक धमाका होते ही सब धुआं-धुआं हो जाता है,
मंज़र ही बदल जाता है यहां, वीराना पसर सा जाता है। 

कोई किसी का पति था, तों कोई किसी का पिता,
कोई किसी की माई थी, तो कोई किसा का भाई था,
हर बार किसी का अपना यहां, मौत से क्यों मिल जाता है।

पलभर का ही सब खेल था, पल भर में ही सब ख़त्म हुआ,
जो शख़्स किसी का सबकुछ था, पलभर में उससे दूर हुआ,
हर बार बेकसूरों को ही, क्यों खून बहाना पड़ता है।

देश के ठेकेदारों ज़रा एक बात का मुझको जवाब दो
कुछ कर नहीं सकते तो, झूठे वादे किया क्यों करते हो
हर बार हमारे ज़़ख्मों पर झूठा मरहम रखने क्यों आते हो? 

हर बार यही होता है यहां हर बार अंधेरा छाता है
एक धमाका होते ही सब धुंआं धुंआ हो जाता है।




Thursday, September 8, 2011

वास्तु- सूत्र 3

वास्तु के अनुसार ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व (NORTH-EAST) दिशा हमेशा हल्की होनी चाहिए। इस दिशा में toilet बिल्कुल नहीं होना चाहिए। ईशान कोण को हमेशा स्वच्छ तथा पवित्र रखना चाहिए। जहां तक हो सके इस दिशा को हराभरा रखें।
उपाय- इस दिशा में तुल्सी का पौधा लगाएं और नियमित रूप से दिया जलाना चाहिए।
यदि इस दिशा में toilet हो तो उसे बंद कर दें। वहां हल्के नीले रंग का बल्ब जलाएं, नमक से भरा एक पात्र रखें।
इस दिशा में पानी का घड़ा भरकर भी रखा जा सकता है। इससे जलतत्व में वृद्धि होगी और अच्छे  परिणाम देखने मिलेंगे।

Tuesday, September 6, 2011

HOME REMEDIES - अमरूद


अमरूद (Guava)-वैज्ञानिक नाम picidium guajava L. इसे हम जाम, जामफल, सफरी आदि के नाम से भी जानते हैं। अब अमरूद बाजारों में दिखने लगा है। अमरूद का स्वाद तो सबको भाता है पर स्वाद के साथ साथ इसके औषधीय गुण भी जान लें तो फ़ायदा ही फ़ायदा। अमरूद का गूदा लाल और सफेद दोनों रंगों में मिलता है। अमरूद में विटामिन बी और सी दोनों पाए जाते हैं।


औषधीय प्रयोग-
दंत रोग- 3-4 पत्तों को चबाने या पत्तों के काढ़े में फिटकरी मिलाकर कुल्ला करने से दांत दर्द दूर होता है।
मुंह के छाले- पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से छाले ठीक होते हैं।
ह्रदय- अमरूद के फल के बीज निकालकर शक्कर के साथ धीमी आंच पर बनाई हुई चटनी  ह्रदय के लिए फायदेमंद है। इससे कब्ज़ भी दूर होता है।
जुकाम- एक बड़ा अमरूद बीज निकालकर रोगी को खिलाएं और नाक बंद कर पानी पीने को कहें। 2-3 दिन में जुकाम बहकर निकल जाएगा।
खांसी और कफ- अमरूद के अर्क में शहद मिलाकर पीने से सूखी खांसी ठीक होती है। अमरूद को भूनकर खाने से खांसी जुकाम में फायदा होता है।
वमन (उल्टी आना)- अमरूद के पत्तों का क्वाथ 10 ग्राम पिलाने से वमन बंद हो जाती है।
कब्ज़- नाश्ते में अमरूद को कालीमिर्च, काला नमक, अदरक के साथ खाने से कब्ज़, अजीर्ण, गैस ठीक होगी।
गठिया- अमरूद के कोमल पत्तों को पीसकर गठिया के दर्द वाले हिस्सों पर लगाने से लाभ होता है।

नादान बचपन


काग़ज़ की कश्ती थी, पानी का किनारा था,
खेलने की मस्ती थी, दिल ये आवारा था,
कहां आ गए इस समझदारी के दल-दल में, 
वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था।



Friday, September 2, 2011

वास्तु- सूत्र 2

वास्तु के दूसरे सूत्र के अनुसार घर की उत्तर-पूर्व (NORTH-EAST) दिशा यानी ईशान कोण को खाली और साफ सुथरा रखना चाहिए। इस दिशा में सम्भव हो तो हल्की चीजें ही रखें। जितना भार ईशान कोण में हो उसका लगभग डेढ़ गुना वजन नैऋत्य कोण में रखा जाना चाहिए। दक्षिण-पश्चिम (SOUTH-WEST) कोण यानि नैऋत्य कोण भारी होना चाहिए।



वास्तु- सूत्र 1

वास्तु के कुछ नियम हैं, जिनके आधार पर घर का निर्माण किया जाता है, पर निर्माण के वक्त यदि कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए तो नतीजे सुखद होंगे। पुराने ज़माने और आज में बहुत फर्क है। आज हमारा रहन-सहन कहीं सीमित हो चुका है। पहले बड़े-बड़े घर हुआ करते थे, जहां बड़ा सा आंगन होता था। पर आजकल के घर भी आंगन जितने बड़े या यूं कहें कि छोटे हो गए हैं। घर की जगह फ्लैटों ने ले ली है..जो हम नहीं बिल्डर के दिमाग़ से बनाए जाते हैं। बड़े ही खुशकिस्मत लोग होते हैं जो खुद की ज़मीन पर अपने सपनों का घर बनाते हैं। पर जो हमारे पास है उसी में बिना तोड़फोड़ किए कुछ बदलाव किए जा सकते हैं ।

सबसे पहले दिशा का ज्ञान होना चाहिए। जो इस प्रकार है।
उत्तर-पूर्व (NORTH-EAST)- ईशान कोण
दक्षिण-पूर्व (SOUTH-EAST)- आग्नेय कोण
उत्तर-पश्चिम (NORTH-WEST)- वायव्य कोण
दक्षिण-पश्चिम (SOUTH-WEST)- नैऋत्य कोण

* रसोईघर आग्नेय कोण में होना चाहिए। आग्नेय कोण यानि दक्षिण-पूर्व (SOUTH-EAST) का कोना।  खाना पूर्व में मुख कर बनाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर अग्नि तत्व में वृद्धि नहीं हो पाती।

उपाय- दक्षिण-पूर्व (SOUTH-EAST) कोने खाली नहीं होना चाहिए। घर की इलैक्ट्रौनिक वस्तुएं जैसे फ्रीज़. टीवी इत्यादि को इस कोने में रखकर इसे समृद्ध बनाया जा सकता है। इस कोने में लाल रंग का बल्ब जलाना चाहिए।




Thursday, September 1, 2011

" गणपति बप्पा मोरया "



 ऊॅं नमो भगवते गजाननाय। 


वास्तु


वास्तु के बारे में मुझे जानकारी तो थी लेकिन मुझे इसका ज्ञान नहीं था। वास्तुशास्त्र में रुचि थी इसलिए काफ़ी समय से इसे समझने का प्रयास कर रही हूं। पर यह विषय मेरे लिए सिर्फ ज्ञान नहीं है, जब से मैंने वास्तु के नियमों का पालन करना शुरू किया है, मेरा विश्वास इससे जुड़ गया है। मैंने अपने जीवन को पूरी तरह से तो वास्तु  के अनुसार नहीं बदला, क्योंकि वो तो किसी के लिए भी संभव नहीं है, पर जितना बदल पाई हूं उससे मुझे अच्छे और आशचर्यजनक परिणाम देखने मिले हैं। आज से मैं अपने अनुभव इस ब्लॉग पर साझा करूंगी।

Sunday, August 21, 2011

hare krishna !

"Hare Krishna, Hare Krishna, Krishna Krishna, Hare Hare
 Hare Rama, Hare Rama, Rama Rama, Hare Hare "



Wednesday, August 17, 2011

एक सवाल...

अन्ना का अनशन क्यों रोकना चाहती है सरकार..? ये एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है.. सवाल ये भी है कि अन्ना क्यों अनशन करना चाहते हैं..?  पर यदि सारे देश का इस सवाल से सरोकार है तो सरकार क्यों इसे रोकना चाहती है.. अब सरकार इस बात का जवाब दे..
कांग्रेस को देश में आंदोलनों का सबसे ज्यादा अनुभव है.. आखिर इसकी स्थापना हुए एक सदी से ज्यादा समय बीत चुका है.. तो फिर कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार क्यों देश को किसी भी तरह के आंदोलन से रोकने का प्रयास कर रही है.. आंदोलन यानी किसी भी मसले पर असहमत होने का अधिकार.. और उस असहमति को जताने का अधिकार.. फिर क्यों उसे सीमाओं में बांधने का प्रयास किया जा रहा है.. सिर्फ 3 दिनों के लिए अनुमति.. सिर्फ कुछ हज़ार लोगों को इसमें शामिल होने का अधिकार.. सिर्फ कुछ गाड़ियों की पार्किंग.. अब इस सरकार की मनोदशा तो साफ है.. लेकिन इसमें माद्दा कितना है.. ये तो अब आने वाला समय ही बताएगा..
अब अन्ना को रोकने का मतलब है सरकार अगले चुनाव का इंतज़ार भी नहीं करना चाहती.. ये एक ऐसा सत्य है जो शायद इस सरकार में बैठे लोग भी जानते हैं.. इनके सलाहकार या थिंक टैंक.. इनके फायनेंसर मतलब सभी लोग इस बात को बड़ी आसानी से समझ सकते हैं.. वैसे भी करप्शन के इतने आरोप और महंगाई को इस स्तर तक ले जाने के बाद सरकार का ये कदम यकीनन उसे परेशानी में डाल सकता है।
पर यदि अन्ना के आंदोलन के साथ सारा देश है तो फिर जनलोकपाल कानून के बनने में क्या परेशानी है.. यदि सभी दूसरे दल तय कर लें तो कांग्रेस क्या कोई भी इस कानून को बनने से नहीं रोक सकता.. लेकिन ऐसा नहीं है.. क्योंकि दसरे दल इस आंदोलन को ऊपरी समर्थन दे रहे हैं.. भाजपा, बसपा, सपा, कम्यूनिस्ट अब तक इस आंदोलन से सुरक्षित दूरी बनाए हुए हैं। केवल संसद में थोड़ी बहुत जुगाली.. हंगामा.. प्रधानमंत्री को जवाब देने के लिए मजबूर करना क्या इतना पर्याप्त है.. देश और अन्ना के आंदोलन को  इन दलों के एक-दो दिन के आंदोलन से कोई फायदा नहीं होने वाला है..
समय आ गया है कि भगवान सरकार को सदबुद्धि.. दूसरे दलों को इमानदारी, जनता को लड़ने की हिम्मत और पूरे देश को एक नए संघर्ष का माद्दा दे.. शायद तभी कुछ हो पाएगा..  नहीं तो जनता की याददाश्त बहुत कमज़ोर होती है.. और मुर्दा कौमें केवल इतिहास में ज़िंदा रहती हैं..  और देश को मिल जाती है कुछ महापुरूषों की मूर्तियां, कुछ चौक और कुछ जयंतियां-पुण्यतिथियां.. लेकिन अभी भी ज्यादा देर नहीं हुई है.. ज़रुरत है लड़ने की.. कुछ कर गुज़रने की.. समय एक बार फिर हमें खुद को साबित करने की चुनौती दे रहा है.. हमने आज़ादी हासिल की.. अपना संविधान बनाया.. इमरजेंसी थोपने वालों को सत्ता से उतार फेंका..  खुद को एक ताकतवर देश के रूप में स्थापित किया.. अपनी मेधा का लोहा मनवाया.. और अब हम अपना जन लोकपाल भी बनवाएंगे.... जयहिंद..।।

'' उसूलों पे जहां आंच आए, टकराना ज़रूरी है,
जो ज़िन्दा हो तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है।''

अन्ना


 तुम गिराने में लगे थे, तुमने सोचा ही नहीं,
    मैं गिरा तो मसला बन कर खड़ा हो जाउंगा।।

Monday, August 15, 2011

एक नई शुरूआत..

15 अगस्त को हमने अपनी आज़ादी की वर्षगांठ मनाई..  किसी अच्छी शुरूआत के लिए इससे अच्छा समय नहीं हो सकता.. मैने ये तय किया है कि मैं अब से प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट के लिए लाइट्स ऑफ रखूंगी.. मैं जानती हूं कि इससे कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता.. लेकिन बूंद बूंद से ही सागर भरता है.. मैं ये भी कहना चाहती हूं कि ज्यादा ज़रुरी अच्छी सोच है.. पहले अच्छा सोचें तभी कुछ अच्छा कर पाएंगे.. मैं आज से ये छोटी सी शुरूआत कर रही हूं.. आप साथ आएंगे तो हम मिलकर देश के लिए थोड़ी सी बिजली बचा पाएंगे..
जयहिंद ।।

Saturday, August 13, 2011

My brother...

                              


Again it is rakhi...again there is rain, 
again I am alone, again i am feeling the pain!

Market is decorated, sweets are dulcet,
rakhis are praised and so beautiful again!

Again I bought a bond for your wrist,
again I wrapped my emotions into it!

I remembered our childhood today,
I stashed my tears in the eyes again!

Again  I see the sky full of kites,
Again I recall the sport delight!

My brother is so far from me, 
My brother is officially engaged again!

He wanted to come, he tried his best, 
But the time ditched us again!

Meaning of rakhi to me is my brother,
if he is not here, the festival is vain!

I am embarrassed, I am sad
I am missing my brother again !
I am missing my brother again ! !

Thursday, August 11, 2011

16 अगस्त....


16 अगस्त पास आ रहा है.. ऐसा क्या खास है 16 अगस्त को.. देश तो 15 अगस्त को आज़ाद हुआ था.. तो फिर एक दिन बाद ऐसा क्या है..  16 अगस्त से अन्ना हजारे जनलोकपाल बिल को लेकर अपने संघर्ष का दूसरा चरण शुरू करने जा रहे हैं। आज अन्ना ने अपने आंदोलन के लिए जयप्रकाश पार्क का चुनाव कर लिया है..  अन्ना को ये जगह दिल्ली पुलिस ने सुझाई थी.. अन्ना के समर्थन में देशभर में लोग जुटने लगे हैं। अलग-अलग स्थानों से नुक्कड़ सभाओं की खबरें आ रही हैं.. भोपाल में गैस पीड़ितों ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया है.. लब्बोलुआब ये कि अन्ना के समर्थन में पूरा देश एक बार फिर उठ खड़ा होगा.. ये अब तकरीबन निश्चित है।
सादा जीवन उच्च विचार को आदर्श मानने वाले अन्ना ने जब 5 अप्रेल से जंतर मंतर पर अपना उपवास शुरू किया था.. तो सारा देश ही उमड़ पड़ा था.. आंदोलन के विस्तार को देखते हुए अंतत: सरकार ने अन्ना के आंदोलन से सहमति जताई थी.. सरकार का सहमत होना एक बड़ी जीत थी.. लेकिन अन्ना जानते थे कि उनकी राह आसान नहीं है.. उन्होंने इस बात के संकेत दे दिए थे कि वो अब शांत नहीं बैठने वाले हैं.. बाद में सरकार के रवैये को देखते हुए उन्होंने 16 अगस्त को अपना आंदोलन दोबारा शुरू करने की बात की थी.. 
इस उम्मीद के साथ कि इस बार अन्ना देश के लिए जनलोकपाल कानून बनवाने में सफल होंगे.. मैं भी पूरे देश के साथ 16 अगस्त की राह देख रही हूं... 

Sunday, August 7, 2011

friendship day...

Since morning
I was thinking of you.. my friends..
don't you....
I want to fight with you
want to share my hard feelings with you
want to cry on your shoulders
my friend.. 
don't you....
My friends...who were very dear to me, who were
i found near to me..
Some says friends are for life...
i found some in my life..
some left... and some apart...
some are close to my heart...
I am lucky that i have you..
but please, keep in touch.. 
and be my friend for ever..
with 
all the hard & soft feelings..
differences we were having..
all the cadbury five stars, 
pastry's, samosa's
and 
with tears
my friend.
& don't dare forget me..
happy friendship day...
my friends......
my parents..
my lovely little sisters
my students
my keshu

love & regards

parul



Friday, August 5, 2011

नम आंखें....


अपने आंचल में आज देखा 
आंसुओं की नमी थी..
मगर मैं तो रोई न थी..
तो फिर ये आंसू कैसे?
जवाब मासूम सा था,
आंसू नन्हीं आंखों के थे।
उसकी आंखें ही बोलती हैं..
वो मेरी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं..
ज़िंदगी है..
वो आज परेशान है..
मेरे आंचल में सुकून तलाश रहा है..
मुझे पता है..
उसे लगता है
मां सब कुछ ठीक कर देगी..
मां..
पर वो शायद समझ रहा है..
मेरी छलकी आंखों ने उसे जवाब दे दिया है..
उसका और मेरा दर्द एक है.
मै परेशान हूं..
क्योंकि वो परेशान है..
मेरा बेटा..मेरा सबकुछ..
मेरी आंखें भी अब नम हैं..
और वो 
मेरे आंसू पोछ रहा है..



Tuesday, July 26, 2011

SENORITA !!

मुझे डांस करना नहीं आता..पर ये कौन सा गाना है जिसे सुनते ही मैं अपने आप थिरकने लगी...सैनोरीटा !!
कुछ तो ख़ास है इसमें...जो किसी को भी झूमने पर मजबूर कर दे। ज़ोया अख़्तर के गानों में अकसर ये देखने मिलता है, उनके गीत बहुत ही जीवंत होते हैं। शंकर ऐहसान ल़ॉय का संगीत और ज़ोया अख़्तर, ये जोड़ी हमेशा कमाल ही दिखाती है। उनके गाने सुनने में तो अच्छे हैं ही देखकर भी आप बोर नहीं होंगे। और गाना  ख़त्म होने पर आप दोबारा सुने बिना नहीं रह पाएंगे। मन खुश होगा और शरीर में नई ऊर्जा का संचार भी । असल में ये गाना स्पैनिश धुन पर आधारित है...जिसमें कुछ स्पैनिश और हिन्दी बोलों को पिरोया गया है। और सबसे अच्छी बात तो ये है कि इस गीत को किसी जानेमाने प्लेबैक सिंगर ने नहीं गाया है। बल्कि फिल्म के तीनों अभिनेता फ़रहान अख़्तर, ऋतिक रौशन और अभय देओल ने अपनी आवाज़ से संवारा है। भारतीय और स्पैनिश धुन का ये संगम काबिले तारीफ हैं।



ज़ोया की फिल्म 'लक बाई चांस' का गाना 'बावरे' याद है न ? भला उसे कौन भुला सकता है...वो गीत शरीर में थिरकन भर देता है। वो भी राजस्थानी लोक संगीत पर आधारित गीत है।

असल में गानों पर मेहनत तो बहुत की जाती है पर कुछ ही गाने लोगों के प्रिय बन पाते हैं। कारण भले ही अपने-अपने अलग हों। तो थोड़ा वक़्त अपने लिए भी निकालिए, कुछ देर डूब जाइए इन गीतों में...तनाव खुद-ब-खुद दूर भाग जाएगा।



Sunday, July 17, 2011

क्या हम सुरक्षित हैं?


क्या हम सुरक्षित हैं? अब इस सवाल के मायने ही ख़त्म हो गए हैं, सुरक्षा का अहसास अब इस देश के हर व्यक्ति के दिल से निकलता जा रहा है। मुंबई के ब्लास्ट तो बहुत बड़ी बात है.. लोग तो सरकार से जुड़ी हर चीज़ से डरने लगे हैं।  सफर करने से डर लगता है,  लड़कियां अकेले घर से निकलने से डरती हैं, आम आदमी महंगाई से डरता है, कहीं पैट्रोल के दाम और न बढ़ जाएं इससे डर लगता है, बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर लगता है, पुलिसवालों से डर लगता है। पूरा देश डर के साये में जीता है आज...मुंबई के जज़्बे और हिम्मत के बारे में लिखने वाले लिखते तो बहुत हैं..लेकिन मुंबई का आम आदमी करे भी तो करे क्या, क्या घर छोड़ कर चला जाये...जाएगा भी तो कहां ? हर जगह तो बारूद बिछी है। सरकार पर भरोसा ख़त्म हो चला है अब, सारे वादे ख़ोखले हैं, सरकारी नुमाइंदे जैसे पुलिस.. अब डराती है, । कभी अन्ना और रामदेव जैसे लोग थोड़ी आस जगा जाते हैं...लेकिन सरकारी गलियों से गुजरकर ये नारे भी अपना रुप बदल लेते हैं। 

Monday, April 11, 2011

एक खबर..

यूं तो हर रोज़ अखबार मन झकझोर देने वाली ख़बरों से भरा होता है, पर कुछ खबरें ऐसी भी होती हैं जो ज़ेहन से निकल नहीं पातीं। आज भी एक पन्ने पर कुछ ऐसा ही था.. दो लड़कियों के साथ बलात्कार! एक 18 साल की और एक सिर्फ 3 साल की। गुड़गांव में रहने वाली 18 साल की इस लड़की को उसके ही रिश्तेदार ने अपनी हवस का शिकार बनाया...बचकर किसी तरह भागी तो बाहर कुछ लोगों से मदद मांगी..पर किस्मत की मारी थी..वो चार लोग थे जिन्होंने मदद के नाम पर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया और द्वारका इलाके में छोड़ गए। लड़की ने  खुद थाने जाकर मामले की जानकारी पुलिस को दी।  दूसरी ओर दिल्ली के कापसहेड़ा इलाके में 3 साल की इस लड़की से किसी दरिंदे ने दुष्कर्म किया। बच्ची के परिजनों ने पुलिस को बच्ची के लापता होने की जानकारी दी और अपहरण का केस दर्ज किया गया। सुबह बच्ची की लाश सड़क पर पड़ी मिली।
आज दुर्गाष्टमी है.. लोग घरों में  कन्याओं को बुलाकर बड़े प्रेम भाव से खाना खिलाते हैं.. उनको देवी का स्वरूप मानकर उनके पांव छूते हैं। और इसी दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जो देवी जैसी इन नन्ही बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाते हैं.. इतने अंधे हो जाते हैं कि उम्र का लिहाज़ भी नहीं  करते।
हम क्या कर पाते हैं... थोड़ा सा दुखी होते हैं.. गुस्सा भी आता हैं , पर आंखों के आंसू  बनकर  कुछ देर में पानी की तरह बह जाता है। है न ?

Tuesday, March 29, 2011

एक शुरुआत..


चाय की चुस्कियों के साथ फिर एक नए दिन की शुरूआत
लेकिन आज कुछ खास है..

आज दिन के साथ कुछ नया करने की शुरूआत है..
कुछ करने, गढ़ने की लालसा,
मेरी उंगलियों ने कीबोर्ड पर कुछ उकेरना शुरू कर दिया है..
पर ये क्या है...
एक खूबसूरत ख्याल जो सुनने में भी स्वाद की ही तरह मीठा है...
आज से मैने रियाज़ शुरू कर दिया है..